कांग्रेस के बिखराव से NDA को फायदा? न लालू से बदली हवा, न ‘लाल’ ने किया कमाल, उपचुनाव में कैसे पार लगी जदयू की नैया

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बिहार विधानसभा की दो सीटों कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) और तारापुर में हुए उपचुनाव में दोनों पर अपना कब्जा बरकरार रखने में जदयू कामयाब रहा है। इस नतीजे से यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज पर जनता ने मुहर लगा दी है। एनडीए सरकार पर जनता का विश्वास बरकरार है। दोनों सीटों पर जीत के लिए जदयू ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, ताकत तो सभी ने झोंकी, पर नैया जदयू की पार लगी। इस उप चुनाव में एनडीए ने एकजुटता भी दिखाई। उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, भाजपा नेता सुशील मोदी, हम अध्यक्ष जीतनराम मांझी, वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी, रालोजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के बीच एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार के लिए बेहतर तालमेल रहा। वहीं, महागठबंधन में दरार पड़ा और राजद से अलग होकर कांग्रेस चुनाव लड़ी तो इस बिखराव का असर परिणाम पर भी पड़ा।

उधर, राजद ने भी अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार के लिए अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। यही कारण रहा कि दोनों सीटों पर मुकाबला अंत तक काफी दिलचस्प रहा। खासकर मतों की गिनती के दौरान तारापुर में जदयू और राजद उम्मीदवारों के बीच जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिखा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं दो दिन चुनाव प्रचार में गये। दोनों सीटें – तारापुर और कुशेश्वरस्थान में उन्होंने कुल पांच सभाएं कीं। 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने दोनों विधानसभाओं में एक-एक सभा को संबोधित किया। वहीं, 26 अक्टूबर को तारापुर में दो तथा कुशेश्वरस्थान में एक सभा की। जदयू के अन्य बड़े नेताओं की टीम दोनों विधानसभा में जमी रही। उधर, राज्य सरकार में जल संसाधन मंत्री संजय झा कुशेश्वरस्थान में निरंतर मोर्चा संभाले रहे। उन्होंने पूरी मेहनत की। कांग्रेस के अलग लड़ने से यह खतरा हो गया था कि सवर्ण वोट बंट सकता है। इस वोट को एनडीए खेमे में एकजुट करने में संजय झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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दूसरी ओर, तारापुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, जदयू के वरिष्ठ नेता और शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कन्हैया सिंह प्रचार की डोर मुस्तैदी से थामे रहे। वे 15 अक्टूबर से ही तारापुर में कैंप किये हुए थे। जदयू एमएलसी संजय सिंह भी प्रचार में जमे रहे। वहीं, केंद्रीय इस्पात मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह भी दोनों क्षेत्रों में लगातार चुनाव प्रचार और जनसंपर्क अभियान में पूरी तरह जुटे रहे। कार्यकर्ताओं से चुनावी रणनीति व मंथन में लगे रहे।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने दो जनसभाएं कीं
उपचुनाव के दौरान राजद ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने दो जनसभाएं कीं, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 40 से अधिक नुक्कड़ सभाएं की। यही नहीं, तेजस्वी यादव चुनाव प्रचार के चलते पटना में विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए। राजद प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के अनुसार पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद ने एक दिन कुशेश्वरस्थान व तारापुर में जनसभाएं की। वहीं, तेजस्वी प्रसाद यादव ने तीन-तीन दिन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में अकेले और एक दिन लालू प्रसाद के साथ चुनाव क्षेत्रों में गए और जनसभाओं में शामिल हुए। श्री गगन के अनुसार, तेजस्वी यादव तीन-तीन दिनों में दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 20-20 स्थानों पर नुक्कड़ सभाओं में शामिल हुए और रोड शो किए। मतगणना के पूर्व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कुशेश्वरस्थान निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना को लेकर दरभंगा में कैंप किया और एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी। जबकि तारापुर निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना हेतु मुंगेर में प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ जमे रहे।

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अकेले अखाड़े में उतरी कांग्रेस जमानत भी नहीं बचा पाई
राजद से नाता तोड़कर कांग्रेस के अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने से एनडीए खेमे को यह अंदेशा था कि सवर्ण समुदाय के वोट में कहीं सेंघ न लग जाए। विशेषकर कन्हैया, अखिलेश सिंह, मदन मोहन झा सरीखे कांग्रेस नेताओं के ताबड़तोड़ चुनावी सभाओं से एनडीए नेताओं के मन में यह आशंका थी। इस कारण एनडीए के सवर्ण नेताओं में ललन सिंह, कन्हैया सिंह, संजय सिंह, नीरज कुमार जैसे कई नेता सक्रिय हुए। लेकिन चुनावी नतीजों ने बता दिया कि कांग्रेस को क्षेत्र के मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया। वह दोनों सीटों पर जमानत भी नहीं बचा पाई। वहीं, एनडीए के जनाधार में कोई अंतर नहीं आया। कुशेश्वरस्थान पर अपना दावा जताने वाली कांग्रेस को मात्र 5603 वोट ही आए जो कुल मतों का 4.28 फीसदी रहा। वहीं तारापुर में स्थिति और खराब रही। इस बार राजेश कुमार मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें मात्र 3590 मत ही मिले जो कुल मतों का 2.16 फीसदी रहा। लोजपा (रामविलास) ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे पर उनका अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा।

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